बुधवार, 30 सितंबर 2020

"अब "



 "अब" अर्थात  वर्तमान यानि जो पल जी रहें है...ये पल अनमोल है...इसमे संभावनाओं का अनूठापन है...अनंत उपलब्धियों की धरोहर छिपी है इस पल में.... फिर भी ना जाने क्यूँ हम इस पल को ही बिसराएँ रहते हैं....इसी की अवहेलना करते रहते हैं.....इसी से मुख मोड़े रहते हैं। अब के स्वर्णिम पलों को छोड़कर एक भ्रम में जिये जाते हैं हम... अतीत के यादों का भ्रम.....बीती बातों का भ्रम...आने वाले कल के आस और सपनो का भ्रम....भविष्य की चिंता का भ्रम.....अपने आपको ना जाने कितने ही भ्रम जाल में उलझाए रहते हैं हम।  ये अतीत की यादों और वादों का भॅवर हमें डुबोते चले जाते हैं.....ये भविष्य के आशाओं और चिंताओं का मकड़जाल हमें ऐसे  हुए उलझाते हैं कि हम अपने सही  कर्मो से ही बिमुख हो जाते हैं। 

    कल को सँवारने के लिए हमें "अब " में जीना होता है। जीवन जैसा भी हो उसे स्वीकारना और उसकी उलझनों से जूझना पड़ता है। जीवन की जटिलताओं और यथार्थ को सहर्ष स्वीकार कर सघर्षरत रहना पड़ता है। "अब "की अवहेलना कर हम कल को नहीं सँवार सकते हैं। पर पता नहीं क्यूँ  हम इस सत्य को समझते ही नहीं और यदि समझ भी गए तो उसे स्वीकार नहीं कर पाते। हमारी आदत बन चुकी है अतीत की यादों और भविष्य की कल्पनाओं के झूले में झूलते रहने की। इन झूलों में झूलते हुए हमें रात्रि के सपने तो मिल सकते हैं परन्तु जागरण का सूर्योदय नहीं मिल सकता। ऐसा नहीं है कि हम सपने सिर्फ सोते हुए ही देखते हैं....जागते हुए भी हमारा मन इन्ही सपनों के सागर में तैरता रहता है। दरअसल, अतीत की यादें और भविष्य के सपने भी मन के लिए एक नशा जैसा ही होता है जो जीवन की सच्चाईयों से भागने का बहाना मात्र है। 

   हम रोज सुबह जागते तो जरूर है परन्तु असली जागरण तो तब होता है जब "अब "के सूर्योदय में आँखें खुलती है। वर्तमान के क्षणों में जागने से ही मन नशामुक्त होता है। तब ऐसा था अब ऐसा कब होगा, बस ये सोचते भर रहने से जीवन या समाज में  परिवर्तन नहीं आता। "अब "के महत्व को समझ, इस क्षण के वास्तविकता को स्वीकार कर हमें कर्म करने होते हैं तभी हम कल के भविष्य को  बदल सकते हैं....अपनी दशा-मनोदशा को बदल सकते हैं....अपने सपनों को सच कर सकते हैं...समाज को बदल सकते हैं। जीवन तभी सार्थक होगा, जब हम गुजरे कल को भूलकर उसकी गलतियों से सीखकर, आने वाले कल की चिंता से मुक्त होकर आज को, अभी को, अब को संवारने लगगे। 


30 टिप्‍पणियां:

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    1. सहृदय धन्यवाद,स्वागत है आपका शिवम जी

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  2. सुंदर विचार। 'अतीत के आह्लाद' से 'भविष्य के भय' तक वर्तमान का वितान तना होता है।

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    1. सहृदय धन्यवाद,विश्वमोहन जी,सादर नमन

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  3. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 02-10-2020) को "पंथ होने दो अपरिचित" (चर्चा अंक-3842) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

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    1. चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए हृदयतल से आभार मीना जी,सादर नमन

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    1. सहृदय धन्यवाद दी,आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार,सादर नमस्कार

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    1. सहृदय धन्यवाद सर,दिल से आभार आपका ,सादर नमस्कार

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    1. सहृदय धन्यवाद सखी,प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार ,सादर नमस्कार

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  7. जागरण कराता हुआ अनमोल वचन । आभार ।

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    1. सहृदय धन्यवाद अमृता जी,स्वागत है आपका

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  8. "अब "के महत्व को समझ, इस क्षण के वास्तविकता को स्वीकार कर हमें कर्म करने होते हैं तभी हम कल के भविष्य को बदल सकते हैं....
    बहुत सुन्दर और अनमोल संदेश देता लेख ।

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    1. सहृदय धन्यवाद सखी,स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार ,सादर नमस्कार

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  9. समय के महत्व को समझाता विचारपूर्ण लेख 🙏

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    1. सहृदय धन्यवाद सर,उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार ,सादर नमस्कार

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  11. वर्तमान का महत्व बतलाता विचारणीय आलेख।

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  12. आज के समय का महत्व दर्शाता हुआ लेख, बहुत सुंदर ।

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    1. धन्यवाद मधुलिका जी,इस सुंदर प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से आभार

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    2. जीवन तभी सार्थक होगा, जब हम गुजरे कल को भूलकर उसकी गलतियों से सीखकर, आने वाले कल की चिंता से मुक्त होकर आज को, अभी को, अब को संवारने लगगे।


      समय के महत्व को दर्शाता सार्थक लेख

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kaminisinha1971@gmail.com

"अब "

 "अब" अर्थात  वर्तमान यानि जो पल जी रहें है...ये पल अनमोल है...इसमे संभावनाओं का अनूठापन है...अनंत उपलब्धियों की धरोहर छिपी है इस ...