सोमवार, 5 नवंबर 2018

टूटते - बिखरते रिश्ते


         आज कल के दौड के टूटते बिखरते रिश्तो को देख दिल बहुत वय्थित हो जाता है और सोचने पे मज़बूर हो जाता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है ? आखिर क्या थी पहले के रिश्तो की खुबियां और क्या है आज के टूटते बिखरते रिश्तो की वज़ह ? आज के इस व्यवसायिकता के दौड में रिश्ते- नातो को भी लाभ हानि के तराज़ू में ही तोला जाने लगा है. ज़िंदगी छोटी होती जा रही है और ख्वाइशे बड़ी होती जा रही है. मैं ये नही कहूँगी कि मैं आप को रिश्तो को संभालना सिखाऊंगी,उसको निभाने की कोई टिप्स बताऊँगी .मैं ऐसा बिलकुल नहीं करुँगी क्युकि " रिश्ते" समझाने का बिषय बस्तु नहीं है . रिश्तो को निभाने के लिए समझ से ज्यादा  भावनाओ की जरुरत होती है. रिश्तो के प्रति आप का खूबसूरत एहसास ,आप की भावनाये ही आप को रिश्ते निभाना सिखाता है और आज के दौड में इंसान भावनाहीन ही तो होता जा रहा है. मैं तो बस रिश्तो के बिखरने की बजह ढूढ़ना चाहती हूँ .और पढ़िये 


दोष किसका ???

     नमस्ते आंटी जी, कैसी है आप - शर्मा आंटी  को देखते ही मैंने हाथ जोड़ते हुए पूछा।      खुश रहो बेटा....तुम कैसी हो...कब आई दिल्ली....बिटिय...